Published on Jun 14, 2026
झारखंड में राशन व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्यभर में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। विभाग की समीक्षा में ऐसे लाखों राशन कार्ड सामने आये हैं, जिनसे कई महीनों से राशन का उठाव नहीं किया गया है। अब सरकार इन कार्डों का सत्यापन कर पात्रता के आधार पर कार्रवाई करने की तैयारी में है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 8 लाख से अधिक ऐसे राशन कार्डधारी चिन्हित किये गये हैं, जिन्होंने पिछले छह महीने से लेकर एक साल या उससे अधिक समय से राशन नहीं लिया है। सरकार का मानना है कि इनमें बड़ी संख्या में निष्क्रिय या अपात्र कार्ड हो सकते हैं। इसी वजह से जिला स्तर पर भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा शुरू किये गये इस अभियान के तहत अब तक लाखों राशन कार्डधारियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन कार्डधारियों का लंबे समय से राशन उठाव नहीं हुआ है, उनके घर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाये।
अगर जांच में कार्डधारी अपात्र पाया जाता है या लंबे समय से कार्ड निष्क्रिय है, तो ऐसे राशन कार्ड को रद्द किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अनाज केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।
विभागीय जांच में कई डुप्लीकेट राशन कार्ड भी सामने आये हैं। अभी हजारों ऐसे मामलों का सत्यापन बाकी बताया जा रहा है। खासकर पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में डुप्लीकेट कार्ड की संख्या अधिक पायी गयी है।
इसके अलावा कुछ ऐसे राशन कार्ड भी चिन्हित किये गये हैं, जिनमें लाभुक की उम्र असामान्य दर्ज है। कई मामलों में कार्डधारी की उम्र 100 वर्ष से अधिक या 18 वर्ष से कम दर्ज मिली है। विभाग ने ऐसे मामलों की भी जांच तेज करने का निर्देश दिया है।
एक तरफ सरकार निष्क्रिय और फर्जी राशन कार्ड हटाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में नये राशन कार्ड और नाम जोड़ने के लाखों आवेदन अभी लंबित हैं।
जानकारी के अनुसार नये राशन कार्ड के लिए बड़ी संख्या में आवेदन अधिकारियों के लॉगिन में लंबित पड़े हैं। इसके अलावा पुराने राशन कार्ड में परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ने के आवेदन भी अब तक स्वीकृत नहीं हो सके हैं।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत राज्य में अभी भी कई सीटें खाली हैं। कुछ जिलों में रिक्तियों की संख्या अधिक होने के कारण वहां लंबित आवेदनों के जल्द निष्पादन का निर्देश जारी किया गया है।
खाद्य आपूर्ति विभाग ने साफ कर दिया है कि अब राशन कार्ड में किसी भी नये सदस्य का नाम बिना ई-केवाईसी के नहीं जोड़ा जायेगा। सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाये।
सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी अनिवार्य होने से फर्जी लाभुकों की पहचान आसान होगी और जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ सही तरीके से मिल सकेगा।
अगर आपने लंबे समय से राशन नहीं उठाया है, तो जल्द अपने राशन डीलर या संबंधित प्रखंड आपूर्ति कार्यालय से संपर्क करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आपके परिवार के सभी सदस्यों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका हो।
यदि आपने नया राशन कार्ड या नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है, तो आवेदन की स्थिति समय-समय पर जांचते रहें ताकि किसी प्रकार की त्रुटि होने पर उसे समय रहते सुधारा जा सके।
झारखंड सरकार का यह अभियान सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। निष्क्रिय और डुप्लीकेट राशन कार्ड हटने से वास्तविक लाभुकों को फायदा मिलेगा और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा।