Published on Jul 22, 2026
रांची: झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार लगातार निगरानी बढ़ा रही है। अब यदि कोई राशन डीलर निर्धारित मात्रा से कम राशन वितरित करता है और शिकायत सही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में प्रति किलोग्राम ₹100 तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
इसके साथ ही सरकार ने गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाने वाले अपात्र लाभार्थियों की पहचान करने का अभियान भी तेज कर दिया है। ऐसे मामलों में राशन की वसूली और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने उचित मूल्य दुकानों पर इलेक्ट्रॉनिक वज़न मशीन (E-Weighing Machine) और e-POS मशीन उपलब्ध कराई हैं।
दोनों मशीनें एक-दूसरे से जुड़ी होने के कारण वितरण के समय राशन की मात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है। इससे कम तौल देने की संभावना काफी कम हो जाती है और वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है।
यदि किसी लाभार्थी को निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जाता है, तो वह संबंधित शिकायत प्रणाली के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
शिकायत की जांच में यदि डीलर दोषी पाया जाता है, तो विभागीय नियमों के अनुसार उसके खिलाफ आर्थिक दंड सहित अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
राज्य सरकार को केंद्र सरकार की ओर से ऐसे लोगों की सूची प्राप्त हुई है, जिन्होंने कथित रूप से गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाया है।
इन मामलों की जांच की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति अपात्र होते हुए भी सरकारी राशन योजना का लाभ लेता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी पात्रता मानकों के अनुसार कुछ श्रेणियों के लोग राशन कार्ड योजना के लिए पात्र नहीं माने जा सकते। उदाहरण के तौर पर—
अंतिम पात्रता का निर्धारण विभाग द्वारा जारी नियमों और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
विभागीय नियमों के अनुसार यदि कोई लाभार्थी लगातार लंबे समय तक राशन प्राप्त नहीं करता है, तो उसके राशन कार्ड की समीक्षा की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर विभाग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।
सरकार ने सभी राशन कार्डधारियों से अपील की है कि—
इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और जरूरतमंद लोगों तक सीमित रखने में मदद मिलेगी।
राशन वितरण केंद्र पर जाने के बाद लाभार्थियों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए—
झारखंड सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और वास्तविक पात्र परिवारों तक राशन का लाभ पहुंचाना है। इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के उपयोग, शिकायत व्यवस्था और अपात्र लाभार्थियों की पहचान जैसी पहल से राशन वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लाभार्थियों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए।